आचार्यश्री ने आचार्य भिक्षु को स्मरण कर उनके जीवनवृत्त से सीखने की दी प्रेरणाचतुर्विध धर्मसंघ ने आचार्य भिक्षु का किया स्मरण, अर्पित की भावांजलिमहाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी उनके आचार के प्रति सजगता को किया व्याख्यायित
माधावरम, चेन्नई (तमिलनाडु): चेन्नई के माधावरम में वर्ष 2018 के लिए चतुर्मास प्रवास स्थल परिसर में बने भव्य ‘महाश्रमण समवसरण’ प्रवचन पंडाल में उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ ने तेरापंथ धर्मसंघ के प्रणेता आचार्य भिक्षु के जन्मदिवस को तेरापंथ के ग्यारहवें अनुशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में ‘बोधि दिवस’ के रूप में मनाया। इस अवसर पर आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को महामना आचार्य भिक्षु के जीवन वृतांतों सुनाते हुए उनके जीवन से सीख लेने की प्रेरणा प्रदान की। वहीं साध्वीप्रमुखाजी ने आचार्य भिक्षु के अपने आचार के प्रति कठोरता और पूर्ण निष्ठा का वर्णन कर प्रवर्तक आचार्य को भावांजलि अर्पित की।
बुधवार को ‘महाश्रमण समवसरण’ में ‘बोधि दिवस’ के रूप में आयोजित प्रातः के मुख्य मंगल प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुआंे को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आज आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी के दिन तेरापंथ धर्मसंघ के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु का जन्म हुआ था। उस क्षेत्र का गौरव बढ़ जाता है, जहां जन्म लेने वाला बच्चा विशिष्ट पुरुष बन जाता है। राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के कंटालिया गांव में जन्मे आचार्य भिक्षु संत बनने से पूर्व गृहस्थ भी रहे। आदमी के वर्तमान जीवन पर पूर्वजन्म का भी प्रभाव होता है। जिसके कारण कोई आदमी शांत तो कोई क्रोधी तो कोई बुद्धिमान तो कोई मूर्ख हो जाता है। आचार्यश्री ने आचार्य भिक्षु के जीवनकाल की घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि उनकी माता दींपाजी उन्हें दीक्षा की आज्ञा देने से बार-बार इंकार कर दिया तो उनके गुरु आचार्य रघुनाथजी ने उन्हें ऐसी प्रेरणा दी तो फिर वे दीक्षा की आज्ञा दे दी। बगड़ी में उनकी दीक्षा हुई। अब वे संत भिखणजी बन गए। अपनी प्रखर बुद्धि और कुशल प्रशिक्षण से उनका प्रभाव बढ़ने लगा। वे एक अच्छे प्रखर संत बने। बाद में उन्होंने सत्य के मार्ग पर चलने हेतु अपने स्थानकवासी परंपरा को छोड़ नए पंथ का प्रतिपादन किया जो आज तेरापंथ के रूप में स्थापित है। ऐसे आचार्य भिक्षु का जन्मदिवस जो ‘बोधि दिवस’ के रूप में प्रतिष्ठित है। आज के दिन हम आचार्य भिक्षु को श्रद्धा के साथ वंदन करता हूं। उनसे हम सभी को प्रेरणा और संरक्षण मिलता रहे।
आचार्यश्री के मंगल उद्बोधन से पूर्व महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने भी आचार्य भिक्षु के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके कठोर आचार की साधना को व्याख्यायित किया। इसके उपरान्त मुनि योगेशकुमारजी, मुनि मननकुमारजी, शासनश्री साध्वी जिनप्रभाजी ने आचार्य भिक्षु के विषय में अपनी-अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए अपने आराध्य को विनयांजलि अर्पित की। साध्वी प्रमिलाकुमारीजी ने काव्यपाठ के द्वारा आचार्य भिक्षु को स्मरण किया। समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्री गौतमचंद सेठिया ने आचार्य भिक्षु के प्रति अपनी प्रणति अर्पित की। जैन विश्व भारती के अध्यक्ष व चेन्नई चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री रमेश बोहरा व अन्य ने भगवई खण्ड-1 की प्रश्न पुस्तिका को आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।
बुधवार को ‘महाश्रमण समवसरण’ में ‘बोधि दिवस’ के रूप में आयोजित प्रातः के मुख्य मंगल प्रवचन में उपस्थित श्रद्धालुआंे को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आज आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी के दिन तेरापंथ धर्मसंघ के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु का जन्म हुआ था। उस क्षेत्र का गौरव बढ़ जाता है, जहां जन्म लेने वाला बच्चा विशिष्ट पुरुष बन जाता है। राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के कंटालिया गांव में जन्मे आचार्य भिक्षु संत बनने से पूर्व गृहस्थ भी रहे। आदमी के वर्तमान जीवन पर पूर्वजन्म का भी प्रभाव होता है। जिसके कारण कोई आदमी शांत तो कोई क्रोधी तो कोई बुद्धिमान तो कोई मूर्ख हो जाता है। आचार्यश्री ने आचार्य भिक्षु के जीवनकाल की घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि उनकी माता दींपाजी उन्हें दीक्षा की आज्ञा देने से बार-बार इंकार कर दिया तो उनके गुरु आचार्य रघुनाथजी ने उन्हें ऐसी प्रेरणा दी तो फिर वे दीक्षा की आज्ञा दे दी। बगड़ी में उनकी दीक्षा हुई। अब वे संत भिखणजी बन गए। अपनी प्रखर बुद्धि और कुशल प्रशिक्षण से उनका प्रभाव बढ़ने लगा। वे एक अच्छे प्रखर संत बने। बाद में उन्होंने सत्य के मार्ग पर चलने हेतु अपने स्थानकवासी परंपरा को छोड़ नए पंथ का प्रतिपादन किया जो आज तेरापंथ के रूप में स्थापित है। ऐसे आचार्य भिक्षु का जन्मदिवस जो ‘बोधि दिवस’ के रूप में प्रतिष्ठित है। आज के दिन हम आचार्य भिक्षु को श्रद्धा के साथ वंदन करता हूं। उनसे हम सभी को प्रेरणा और संरक्षण मिलता रहे।
आचार्यश्री के मंगल उद्बोधन से पूर्व महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी ने भी आचार्य भिक्षु के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके कठोर आचार की साधना को व्याख्यायित किया। इसके उपरान्त मुनि योगेशकुमारजी, मुनि मननकुमारजी, शासनश्री साध्वी जिनप्रभाजी ने आचार्य भिक्षु के विषय में अपनी-अपनी भावाभिव्यक्ति देते हुए अपने आराध्य को विनयांजलि अर्पित की। साध्वी प्रमिलाकुमारीजी ने काव्यपाठ के द्वारा आचार्य भिक्षु को स्मरण किया। समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने भी अपनी भावाभिव्यक्ति दी। श्री गौतमचंद सेठिया ने आचार्य भिक्षु के प्रति अपनी प्रणति अर्पित की। जैन विश्व भारती के अध्यक्ष व चेन्नई चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री श्री रमेश बोहरा व अन्य ने भगवई खण्ड-1 की प्रश्न पुस्तिका को आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया।
सूचना एवं प्रसारण विभाग
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा

No comments:
Post a Comment