Friday, 20 July 2018

संतों का स्वागत यह त्याग की संस्कृति का स्वागत है -- " शासन श्री " साध्वी श्री ललितप्रभाजी


उधना चातुर्मास प्रवेश के अवसर पर आयोजित संस्कार रैली में श्रावक श्राविकाओं की विशाल उपस्थिति।
तेरापंथी सभा, उधना एवं लिंबायत का शपथ विधि समारोह भी समायोजित हुआ।
महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या " शासन श्री " साध्वी श्री ललित प्रभाजी का तेरापंथ भवन, उधना में आज मंगल चातुर्मास प्रवेश हुआ।
इस अवसर पर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, उधना के तत्वावधान में विशाल संस्कार रैली का आयोजन किया गया जिसमें तेरापंथ युवक परिषद, महिला मंडल, अणुव्रत समिति, जीवन विज्ञान अकादमी, TPF, कन्या मंडल, किशोर मंडल एवं ज्ञानशाला प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं सहित विशाल संख्या में श्रावक श्राविका उपस्थित थे।
चौंसठ जोगणिया माता मंदिर, होम स्टूडियो से प्रारंभ हुई रैली साउथ जोन, आचार्य तुलसी द्वार, उधना तीन रास्ता, उधना गांव होते हुए आचार्य तुलसी मार्ग झांसी की रानी गार्डन होकर तेरापंथ भवन, उधना पहुंची और विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
इस अवसर पर अपने प्रेरक उद्बोधन में " शासन श्री " साध्वी श्री ललित प्रभा जी ने कहा -- भारतीय संस्कृति अध्यात्म प्रधान संस्कृति है। यहां की संस्कृति में तप, त्याग एवं साधना का विशेष महत्व रहा है। आज यहां पर हमारा जो स्वागत हो रहा है वह वास्तव में तो तप और त्याग की संस्कृति का स्वागत है। क्योंकि संत हमेशां संयम एवं त्यागमय जीवन जीते हैं।

साध्वी श्री अमितश्री जी ने कहा -- प्रत्येक कार्यकर्ता सफल होना चाहता है। सफल होने के लिए जुबान पर शुगर फैक्ट्री एवं मस्तिष्क में आइस फैक्ट्री लगाना जरूरी है।
साध्वी श्री लब्धियशाजीने उधना शब्द की परिभाषा समझाते हुए कहा -- U का मतलब है यूनिटी -- एकता। एवं A का मतलब है एक्टिवनेस अर्थात् क्रियाशीलता। जहां यह दोनों तत्व होते हैं वहां सफलता निश्चित रूप से मिल जाती है। साध्वी श्री दिव्ययशाजी ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किए।
उधना तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री बसंतीलालजी नाहर एवं लिंबायत सभा अध्यक्ष श्री महावीर जी बाफना के नेतृत्व में तेरापंथी सभा, उधना एवं लिंबायत की नव मनोनीत कार्यसमिति का शपथ विधि समारोह भी आयोजित हुआ। तेरापंथी महासभा के गुजरात प्रभारी श्री लक्ष्मीलालजी बाफना ने शपथ विधि करवाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। वरिष्ठ श्रावक " अणुव्रत सेवी " श्री सुवालाल जी बोल्या ने श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन कर सभी को संकल्पित किया।
स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए सभा अध्यक्ष श्री बसंती लाल जी नाहर ने कहा -- उधना क्षेत्र पर पूज्यवरों की एवं केंद्र की हमेशा कृपा दृष्टि रही है। उधना सभा को राष्ट्रीय स्तर पर "श्रेष्ठ सभा " का पुरस्कार सतत दो वर्षों से मिलता रहा है। अब सतत तीसरे वर्ष भी ऐसा पुरस्कार मिलेगा तो यह इस क्षेत्र का अहोभाग्य होगा। उन्होंने उधना की कार्यकर्ता शक्ति की सराहना की।
बारडोली के श्रावक श्री ज़वेरीलाल जी बड़ौला ने अठ्ठाई की तपस्या द्वारा साध्वी श्री का स्वागत किया। सभा संरक्षक श्री मोहनलालजी पोरवाड़, भवन निर्माण समिति के श्री नितिन जी बाफना, अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री नेमीचंदजी कावड़ीया, सूरत सभा अध्यक्ष श्री सुशीलजी सुराणा, पर्वत पाटिया सभा के मंत्री श्री पवनजी छाजेड़, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल कार्यसमिति सदस्य श्रीमती मंजूजी नौलखा, तेरापंथ महिला मंडल उधना की अध्यक्षा श्रीमती सुनीताजी कुकड़ा, बारडोली सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री सूजानसिंहजी मेहता, तेयुप.उधना के अध्यक्ष श्री सुभाषजी चपलोत, सचिन से श्री राजमलजी कालिया, चलथान से श्री सुरेशजी पितलिया, तेरापंथ भजन मंडली,कन्या मंडल, महिला मंडल, आदि ने प्रासंगिक अभिव्यक्ति की। आभार ज्ञापन तेरापंथी सभा उधना के उपाध्यक्ष श्री अर्जुनजी मेड़तवाल ने किया। कार्यक्रम का संचालन उधना सभा के मंत्री श्री अशोकजी दुगड़ एवं सहमंत्री श्री अरुणजी चंडालिया ने किया।
साध्वी श्री जी के चातुर्मास प्रवेश के कार्यक्रम में नवसारी, बारडोली, डूंगरी, वलसाड, चलथाण, कडोदरा, किम, कामरेज सहित दक्षिण गुजरात के विविध क्षेत्रों से कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
साध्वी श्री ने आगे कहा -- आज की संस्कार रैली का दृश्य अद्भुत था। आज इंद्र देव भी मेहरबान रहे एवं बारिश का मौसम होते हुए भी कहीं कोई विघ्न नहीं आया। यह पूज्य गुरुदेव की भी विशेष अनुकंपा का प्रसाद है। चातुर्मास धर्म की गंगा के समान है और इस धर्मगंगा में अभिष्णात होना यह प्रत्येक श्रावक का कर्तव्य होता है। उन्होंने श्रावकों को नियमित प्रवचन श्रवण का लाभ लेने की प्रेरणा दी।
अर्जुन मेड़तवाल

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