उधना में पंचदिवसीय संस्कार निर्माण शिविर का समापन
उधना -(अर्जुन मेड़तवाल) शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या " शासन श्री" साध्वी श्री ललितप्रभाजी एवं " शासन श्री " साध्वी श्री शिवमालाजी के सान्निध्य में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, उधना द्वारा आयोजित पंचदिवसीय संस्कार निर्माण शिविर का आज आनंदोल्लास के साथ समापन हुआ।
शिविर में समणी श्री विनितप्रज्ञाजी, जगतप्रज्ञाजी आदि के साथ-साथ श्री पूजा व्यास, डॉ. योगिनिबहन, श्री शैलेश शाह आदि मोटिवटरों द्वारा टाइम मैनेजमेंट, होम मैनेजमेंट, शारीरिक स्वास्थ्य, स्व-सुरक्षा जैसे विषयों पर उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस शिविर में समग्र गुजरात और पालघर से समागत 567 बालिकाओं ने भाग लिया।
समापन समारोह में " शासन श्री " साध्वी श्री ललित प्रभा जी ने कहा - इस शिविर में बालिकाओं को जीवन के विविध पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया गया है। बालिकाएं इस मार्गदर्शन का अपने जीवन निर्माण में उपयोग करें यह अपेक्षित है।
साध्वी श्री ने आगे कहा - बालिकाएं धर्म के संस्कारों को दृढ़ करें। विनय-विवेक, विनम्रता और सहनशीलता जैसे गुणों को जीवन में स्थान दें। वे वर्तमान भौतिक युग में भटकाव से दूर रहें एवं लव-ज़िहाद जैसे षड़यंत्र से अपने आपको मुक्त रखें। शादी एक जीवनभर का रिश्ता हैं। बालिकाएं भावुकता से मुक्त रहें एवं शादी जैसे विषय में माता-पिता की आज्ञा में रहकर ही अपना निर्णय करें।
मुख्य अतिथि RSS के श्री राजेशभाई शाह ने कहा - भारतीय संस्कृति उदारता पूर्ण संस्कृति है। सदियों से कुछ लोग इस उदारता का लाभ उठा रहे हैं एवं भारतीय संस्कृति का ही ध्वंस करना चाहते हैं। हमें पूरी ताकत के साथ इन तत्वों का मुकाबला करना है । "लव जिहाद" आज की सुलगती हुई समस्या है और यह हिंदू बालिकाओं को फुसलाकर मुस्लिम बनाने का षड़यंत्र है। बालिकाएं इस षड्यंत्र में नहीं फंसे इस हेतु उन्होंने विस्तृत समझ दी।
उन्होंने कहा - बालिकाएं अपनी चिंतन शक्ति का विकास करें और अपने माता-पिता जिन्होंने उन्हें जन्म दिया, पाला-पोषा उनकी भावनाओं का आदर करते हुए हमारी भारतीय संस्कृति की सुरक्षा के साथ शादी का निर्णय करें।स्वधर्म में मनुष्य की रक्षा है स्वधर्म छोड़कर विधर्म में न जाएं, अन्यथा जीवनभर पछताना पड़ेगा।
तेरापंथी सभा, उधना के अध्यक्ष श्री बसंतीलालजी नाहर ने शिविर की सफलता में कार्यकर्ताओं की भूमिका की मुक्त भाव से प्रशंसा की।
केंद्रीय संयोजक श्री अनिल जी चंडालिया, स्थानीय संयोजक श्री राजेश जी बाफना एवं अरुण जी चंडालिया ने मंच संचालन किया। श्रीमती महिमा चौरड़िया, श्रेया बाफना एवं दिलखुशबहन मेड़तवाल ने शिविर की विशेषताओं का संवादमय प्रस्तुतीकरण किया। शिविर में संभागी बालिकाओं के विविध ग्रुपों द्वारा रोचक परिसंवाद की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम में उधना सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री सुवालालजी बोल्या, महासभा गुजरात प्रभारी श्री लक्ष्मीलालजी बाफना, उधना सभा के महासभा प्रभारी श्री नानालाल जी राठौड़, सूरत सभा के मंत्री श्री जीतूभाई मेहता, उपाध्यक्ष श्री ललितजी खोखावत आदि उपस्थित रहे। तेरापंथी सभा द्वारा शिविर के आयोजकों प्रायोजकों एवं विशिष्ट कार्यकर्ताओं का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
उधना -(अर्जुन मेड़तवाल) शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या " शासन श्री" साध्वी श्री ललितप्रभाजी एवं " शासन श्री " साध्वी श्री शिवमालाजी के सान्निध्य में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, उधना द्वारा आयोजित पंचदिवसीय संस्कार निर्माण शिविर का आज आनंदोल्लास के साथ समापन हुआ।
शिविर में समणी श्री विनितप्रज्ञाजी, जगतप्रज्ञाजी आदि के साथ-साथ श्री पूजा व्यास, डॉ. योगिनिबहन, श्री शैलेश शाह आदि मोटिवटरों द्वारा टाइम मैनेजमेंट, होम मैनेजमेंट, शारीरिक स्वास्थ्य, स्व-सुरक्षा जैसे विषयों पर उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इस शिविर में समग्र गुजरात और पालघर से समागत 567 बालिकाओं ने भाग लिया।
समापन समारोह में " शासन श्री " साध्वी श्री ललित प्रभा जी ने कहा - इस शिविर में बालिकाओं को जीवन के विविध पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया गया है। बालिकाएं इस मार्गदर्शन का अपने जीवन निर्माण में उपयोग करें यह अपेक्षित है।
साध्वी श्री ने आगे कहा - बालिकाएं धर्म के संस्कारों को दृढ़ करें। विनय-विवेक, विनम्रता और सहनशीलता जैसे गुणों को जीवन में स्थान दें। वे वर्तमान भौतिक युग में भटकाव से दूर रहें एवं लव-ज़िहाद जैसे षड़यंत्र से अपने आपको मुक्त रखें। शादी एक जीवनभर का रिश्ता हैं। बालिकाएं भावुकता से मुक्त रहें एवं शादी जैसे विषय में माता-पिता की आज्ञा में रहकर ही अपना निर्णय करें।
मुख्य अतिथि RSS के श्री राजेशभाई शाह ने कहा - भारतीय संस्कृति उदारता पूर्ण संस्कृति है। सदियों से कुछ लोग इस उदारता का लाभ उठा रहे हैं एवं भारतीय संस्कृति का ही ध्वंस करना चाहते हैं। हमें पूरी ताकत के साथ इन तत्वों का मुकाबला करना है । "लव जिहाद" आज की सुलगती हुई समस्या है और यह हिंदू बालिकाओं को फुसलाकर मुस्लिम बनाने का षड़यंत्र है। बालिकाएं इस षड्यंत्र में नहीं फंसे इस हेतु उन्होंने विस्तृत समझ दी।
उन्होंने कहा - बालिकाएं अपनी चिंतन शक्ति का विकास करें और अपने माता-पिता जिन्होंने उन्हें जन्म दिया, पाला-पोषा उनकी भावनाओं का आदर करते हुए हमारी भारतीय संस्कृति की सुरक्षा के साथ शादी का निर्णय करें।स्वधर्म में मनुष्य की रक्षा है स्वधर्म छोड़कर विधर्म में न जाएं, अन्यथा जीवनभर पछताना पड़ेगा।
तेरापंथी सभा, उधना के अध्यक्ष श्री बसंतीलालजी नाहर ने शिविर की सफलता में कार्यकर्ताओं की भूमिका की मुक्त भाव से प्रशंसा की।
केंद्रीय संयोजक श्री अनिल जी चंडालिया, स्थानीय संयोजक श्री राजेश जी बाफना एवं अरुण जी चंडालिया ने मंच संचालन किया। श्रीमती महिमा चौरड़िया, श्रेया बाफना एवं दिलखुशबहन मेड़तवाल ने शिविर की विशेषताओं का संवादमय प्रस्तुतीकरण किया। शिविर में संभागी बालिकाओं के विविध ग्रुपों द्वारा रोचक परिसंवाद की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम में उधना सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री सुवालालजी बोल्या, महासभा गुजरात प्रभारी श्री लक्ष्मीलालजी बाफना, उधना सभा के महासभा प्रभारी श्री नानालाल जी राठौड़, सूरत सभा के मंत्री श्री जीतूभाई मेहता, उपाध्यक्ष श्री ललितजी खोखावत आदि उपस्थित रहे। तेरापंथी सभा द्वारा शिविर के आयोजकों प्रायोजकों एवं विशिष्ट कार्यकर्ताओं का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

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