Friday, 8 June 2018

पुण्य का उदय धर्म से ही होता है:-आचार्य श्री मणिप्रभसूरीजी



कुशल वाटिका पाल,सूरत में प्रतिष्ठा निमिते गुरु भगवन्तों का भव्य स्वागत सौमेया के साथ गाजते बाजते हुआ
सूरत्त( चम्पालाल छाजेड़ )परम पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवन्त श्री जिन मणीप्रभ सूरीश्वर जी म सा एव उपाध्याय प्रवर श्री मनोज्ञ सागर जी म सा का आज कुशल वाटिका पाल में 16 जून को होने वाली अंजनशालाका प्रतिष्ठा महा महोत्सव निमिते भव्य प्रवेश हुवा।प्रवेश शोभा यात्रा मणिभद्र रेजीडेंसी से आरम्भ होकर पाल के विविध क्षेत्रों की स्पर्सना करती हुई कुशल वाटिका में आकर धर्म सभा मे बदल गई।प्रवेश शोभा यात्रा में सर्वप्रथम जैन धर्म ध्वज,भगवान का रथ,दादा गुरुदेव का रथ,गच्छाचार्य श्री मज्जिन श्री कांतिसागर जी का रथ,बेंड की मधुर धुन एव लगभग 40 ढोल की थाप पर नाचते युवाओ की टोलियां यही कह रही थी कि आज म्हारे आगनिये गुरु जी पधारया,मंदिर एव दादावाड़ी के लाभार्थी परिवार की तो छटा ही निराली थी एक जैसी ड्रेस में पूरा परिवार गुरूदेव को समर्पित भाव से वंदना कर नाच गा रहा था,महिलाये रंग बिरंगी परमरागत राजस्थानी लाल और केसरिया साड़ी में सौमेया के साथ गुरुदेव का स्वागत को आतुर थी।तो पुरुष राजस्थान की आन बान ओर शान का प्रतीक केशरिया छापा पहने गुरूदेव का जयकारा बोल रहे थे और स्वागक्त कार रहे थे।गुरुदेव के आगमन पर जगह जगह तोरण द्वार ओर स्वागक्त द्वार सजाये गए थे।रास्ते की सभी जैन सोसायटियों के बाहर भारी भीड़ गुरूदेव की एक नजर पाने को तरस रही थी।
शोभा यात्रा जैसे ही कुशल वाटिका प्रांगण में पहुची बहनों द्वारा भव्य रंगोली बनाई गई एव युवाओ द्वारा सकल श्री संघ का फूलों से स्वागत किया गया।कुशल वाटिका प्रांगण में सर्व प्रथम दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुवात की गई,उसके बाद मुम्बई से पधारे नरपत ने गुरुदेब के स्वागत में गीत गाया।सिणधरी के जाए जन्मे गायकार महावीर देसाई ने सम्पूर्ण कार्यक्रम में सुर ताल के साथ गीतो के माध्यम से सभी का मन जीत लिया।नन्ही मुँही बालक-बालिकाओं एव मंडोवरा परिवार की बालिका ने गुरुओ के स्वागक्त में गीत गाकर सभी को आनंदित कर दिया।इस पावन अवसर पर उपाध्याय प्रवर श्री मनोज्ञसागर जी म सा ने अपने प्रवचन में कहा कि समाज की एकता एव धर्म प्रभावना कैसे बढ़ाया जावे इस पर समाज को विचार करना चाहिए।युवाओ को बढ़ती फैशन को त्याग कर अपना फेस ओर वेश दोनो का ध्यान रखना चाहिए।आचार्य श्री ने अपने आशिर्बाद प्रवचन में कहा कि जिसके पास होती है उसे किसी तरह की कोई चिंता नही होती है हम सभी को परमात्मा को पाना है या परमात्मा से कूछ पाना है पुण्य का प्रबल उदय धर्म से ही मिलता है अतःधर्म आराधना में लीन रहते हुवे सुकार्य करते रहने चाहिए।इस अवसर पर जीरावला तीर्थ के ट्रस्टी प्रकाश का लाभार्थी परिवारो की तरफ से बहुमान किया गया।इस अवसर पर देश के कई क्षेत्रों से गुरुभक्त पधारे।अंत मे सकल श्री संघ का स्वामीवात्सल्य रखा गया।
गुजरात राज्य की डायमण्ड नगरी,सिल्क सिटी,एव धर्म नगरी सूरत की धन्य धरा पर पाल क्षेत्र में श्री कुशल वाटिका में कुशल वाटिका जैन श्री संघ एव श्री जिनकुशलसुरि खरतरगच्छ जैन ट्रस्ट द्वारा परम पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवन्त श्री जिन मणीप्रभ सूरीश्वर जी म.सा.एव परम पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री मनोज्ञ सागर जी म.सा.की पावन निश्रा में.....
श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एव दादा श्री जिन कुशलसूरी अंजनशलाका प्रतिष्ठा महा महोत्सवे 16 जून शनिवार निमित पंचांहिका महोत्सव (12 जून से 16 जून) कार्यक्रमो में सकल श्री संघ को भाव भरा आमंत्रण।
जिनमन्दिर लाभार्थी:-श्रीमति खम्मादेवी वनेचन्दजी मंडोवरा परिवार सिणधरी-सूरत-होड्डवाला
दादावाड़ी लाभार्थी:-श्रीमती तारादेवी भँवरलालजी मरडिया परिवार डंडाली-जोधपुर-सूरत
10 जून को एक शाम माताजी के नाम भक्ति भावना कार्यक्रम में बालोतरा के सुप्रशिद गायकार श्याम पालीवाल भक्ति की रमझट करेंगे।

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