"टुटते रिश्ते बिखरते परिवार" कार्यशाला 'शासनश्री' साध्वीश्री मधुबालाजी आदि ठाणा -5 के सान्निध्य मे आयोजित
कामरेज- कामरेज में "टूटते रिश्ते बिखरते परिवार" कार्यशाला का आयोजन 'शासन श्री' साध्वी श्री मधुबाला जी के आदि ठाणा-5 के सानिध्य में हुआ। सर्वप्रथम साध्वीश्री 'शासनश्री' साध्वीश्री मधुबालाजी ने बहुत ही प्रभावक शैली में बिखरते परिवारों के बारे में बताया कि- आज सामंजस्य की कमी के कारण परिवारों में बिखराव आ रहा है। सहनशीलता, अनुशासन प्रमोद भावना, वार्तालाप की कमी के कारण संयुक्त परिवार बिखरते जा रहे हैं। यदि हम अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण करें, एक दूसरे की भावनाओं को समझें, अनुशासन और विनम्रता हो तो वह परिवार सुखी बन सकता है। और संयुक्त परिवार के अनेक लाभ हैं हम कहीं जाते हैं तो निश्चिंत होकर जा सकते हैं, कुछ भी काम हो तो मिलजुल के किया जा सकता है

किसी भी परिवार, समाज, संस्था की सफलता सहभागिता से होती है। इच्छाओं पर नियंत्रण कर ले और मन पर थोड़ा सा अंकुश लगा ले तो संयुक्त परिवार को टुटने से बचा सकते है। साध्वीश्री विज्ञानश्रीजी बताया किसी भी परिवार की नींव अनुशासन पर टिकी होती है।अगर परिवार में अनुशासन और विनम्रता है तो वह परिवार सुखी परिवार है।साध्वी श्री मर्यादाश्री जी ने मंगलाचरण, साध्वी श्री सौभाग्य श्री जी ने जिंदगी के बारे में बहुत ही सुंदर कविता की प्रस्तुति दी। शासन श्री साध्वी श्री मंजूलयशा जी ने 'घर का दिव्य नजारा' बहुत ही मार्मिक गीतिका प्रस्तुत की। ऐसी प्रभावक ह्रदयगामी प्रवचन शैली को सुनकरसभी मंत्र मुग्ध हो गए। श्रावक- श्राविका की बहुत ही अच्छी उपस्थिति रही।
रिपोर्ट - अर्जुन मेडतवाल
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