Tuesday, 31 October 2017

साधु जीवन में लक्ष्मण रेखा के उल्लंघन से पतन होता है : पद्मदर्शन जी

सूरत- अठवागेट स्थित नानपुरा जैनसंघ में आचार्य पद्मदर्शन जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि निर्लज्ज आत्मा धर्म प्राप्ति के लिए अनुचित है। पाप के विचारों से सर्वथा बचना ही चाहिए। आचार्य ने कहा कि प्रारंभिक चरण में इससे बचना मुश्किल है। पाप के विचारों का आना सहज है लेकिन यह विचार पाप के आचार में लिप्त कर सकते हैंै। पाप के विचार आचार में परिवर्तित न हो इस लिए लज्जा एक चमत्कारिक गुण है। जिसके जीवन में लज्जा हो, खानदानी हो, बुजुर्गों की मर्यादा हो, पाप का भय, धर्म संस्कारों के गुण इस तरह से होते है जो आप को पाप के विचारों से बचाते हैं। समय के साथ वह पाप के विचारों से भी मुक्त कर देते है। 
आचार्य पद्मदर्शन जी ने कहा कि आज किसे किसी भी शर्म के लज्जा नहीं है। साधु जीवन में पाप करना मुश्किल है आैर गृहस्थ जीवन में धर्म का कार्य करना मुश्किल है। साधु जीवन में पाप के निमित्त नहीं है आैर सद निमित्त ढेरों हैं। लेकिन साधु जीवन में जो भी प्रभु द्वारा निर्मित लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन करता है उसका जीवन में अवश्य तौर से पतन होता है। श्रमण जीवन को बचानेवाली चीज केवल प्रभु की आज्ञा है। गृहस्थ जीवन में सद निमित्त मिलना मुश्किल है। पाप के लिए काफी निमित्त है। अगर गृहस्थ संयम, लज्जा के गुण की उपेक्षा करता है, सद गुरु आैर अपने बुजुर्गों की मर्यादा का उल्लंघन करता है तो जीवन भ्रष्ट हो जाता है। आचार्य ने कहा कि अशुभ निमित्त चिकनी मिट्टी की तरह है जिस पर फिसलने के अवसर अधिक है। 

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