प्रज्ञा पुरुष आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जन्म शताब्दी वर्ष के शुभारंभ पर पांडेसरा में मंगल प्रवचन
पांडेसरा - ( अर्जुन मेडतवाल ) इस विश्व में अनेक महापुरुष हुए हैं उन महापुरुषों की प्रलंब सूची में अग्र पंक्ति में लिया जाने वाला एक नाम है आचार्य श्री महाप्रज्ञ। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का नाम अध्यात्म जगत में अत्यंत गौरव के साथ लिया जाता है। वे वैज्ञानिक नहीं थे लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि उन्हें सहज प्राप्त थी। वे आध्यात्मिक-वैज्ञानिक व्यक्तित्व के निर्माता थे। वे 20वीं एवं 21वीं दोनों शताब्दियों को आलोकित करनेवाले अलौकिक महापुरुष थे।"
आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी वर्ष का शुभारंभ दिनांक 30 जून 2019 को हुआ। इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रेरक प्रवचन देते हुए आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या ,"शासन श्री" साध्वी श्री सरस्वती जी ने पांडेसरा स्वामीनारायण मंदिर परिसर में मंगल प्रवचन देते हुए उपरोक्त शब्दों का उच्चारण किया।
साध्वी श्रीे ने आगे कहा -- आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी महान साहित्यकार थे। उनका ज्ञान असीम था। उनका प्रवचन सुनना जैसे जीवन की विशेष उपलब्धि थी। उन्हें कभी शब्दों को ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती थी, बल्कि शब्द स्वयं उनकी परिक्रमा करते रहते थे। जगत् के प्रायः सभी धर्म ग्रंथों का उन्होंने गहन अध्ययन किया था। वे ज्ञान के हिमालय थे तो ध्यान के महासागर थे। ध्यान साधना की गहराई में जाकर उन्होंने "प्रेक्षाध्यान" नामक ध्यान पद्धति की शोध की जिसके द्वारा हजारों लाखों लोग स्वस्थ एवं सुखी बन गए और बन रहे हैं। पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाप्रज्ञजी के साथ अपने जीवन के अनेक अविस्मरणीय प्रसंगों का उल्लेख करते हुए साध्वी श्री ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की करुणा, स्नेह एवं वात्सल्य को अवर्णनीय बताया।
आकर्षक शब्दचित्र के माध्यम से साध्वी श्री संवेगप्रभा जी ने कहा--आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी दिव्य महापुरुष थे। अपने गुरु आचार्य श्री तुलसी के प्रति उनका समर्पण अद्वितीय था। उनका निर्विकल्प समर्पण हम सबके लिए एक आदर्श बन गया है। साध्वी श्री मृदुला कुमारी जी एवं साध्वी श्री हेमलता जी ने कहा-आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की प्रज्ञा जागृत थी। अहिंसा यात्रा के द्वारा उन्होंने अहिंसा की महत्ता का प्रतिपादन किया, तो साथ ही नैतिक मूल्यों के प्रति भी पूरे देश में जागृति पैदा की। साध्वी श्री अर्चनाश्रीजी, साध्वी श्री नंदिताश्रीजी एवं साध्वी श्री तरुणयशाजी ने कहा -- आचार्य श्री महाप्रज्ञजी अनाग्रही चेतना के धारक थे। परम ज्ञानी होने के बावजूद ज्ञान का भार उन्हें स्पर्श तक भी नहीं कर पाया था।
तेरापंथी सभा, उधना के मंत्री श्री अशोकजी दुगड़ एवं तेरापंथ श्रावक समाज पांडेसरा के अध्यक्ष श्री समर्थ जी चोरडिया ने स्वागत वक्तव्य दिया। तेरापंथी सभा, उधना के उपाध्यक्ष श्री अर्जुन जी मेड़तवाल ने स्वरचित मुक्तकों के द्वारा गुरु चरणों में अपने भाव समर्पित किए। अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री नेमीचंद जी कावड़िया, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती श्रेया बाफना, तेयुप. अध्यक्ष श्री संजयजी बोथरा, उधना सभा के सहमंत्री श्री अरुणजी चंडालिया, तेरापंथ महिला मंडल, कन्या मंडल, ज्ञानशाला आदि ने वक्तव्य,गीत एवं परिसंवाद के द्वारा प्रासंगिक अभिव्यक्ति की। इससे पूर्व एक विशाल अहिंसा रैली निकाली गई जो पांडेसरा के मुख्य मार्गों पर घूमती हुई पुनःतेरापंथ भवन, पांडेसरा पहुंची
कार्यक्रम का मंगलाचरण स्थानीय नवोदित गायक श्री मोक्ष कावड़िया ने किया। कार्यक्रम का संचालन तेयुप. उधना के पूर्व अध्यक्ष श्री मुकेशजी बाबेल ने किया। आभार ज्ञापन पांडेसरा तेरापंथ श्रावक समाज के कोषाध्यक्ष श्री उत्तम जी सोनी ने किया।

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