जैन वाणी (गणपत भंसाली ) 24/04/18
सूरत-- तेरापंथ धर्म संघ के ग्यारवें पट्टधर शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज 57 वां जन्म दिवस हैं। संवत २०१९ में (56 वर्ष पूर्व) आपका राजस्थान के सरदार शहर में जन्म हुआ था। पिता श्री झुमरमलजी व मातुश्री नेमादेवी दुगड़ के चिरंजीव मोहन दुगड़ ने संवत २०३१ (44 वर्ष पूर्व) में अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी की आज्ञानुसार मुनि श्री सुमेरमलजी स्वामी "लाडनू" के कर-कमलों से दीक्षा ग्रहण की थी। आप श्री संवत २०४६ की भाद्रवा शुक्ल ९ को "महाश्रमण" के रूप में लाडनू में तथा संवत २०५४ को भाद्रवा शुक्ल १२ के दिन युवाचार्य के रूप में गंगाशहर में पदासीन हुए। तथा आचार्य श्री के रूप में संवत २०६७ में वैशाख शुक्ला ९ (23 मई 2010) को आप श्री का पदाभिषेक हुआ। महज 12 वर्ष की लघु आयु में दीक्षित हुए तथा मोहन से महाश्रमण व वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण जी ने हजारों -हजारों किलोमीटर की पद यात्रा कर नैतिकता, आध्यत्मिकता, शांति, सद्भावना व व्यसन मुक्ति आदि की जन-जागृति भरी अलख जगाई हैं। आप धीर -गम्भीर, शांत स्वभावी, मितभाषी व्यक्तिव के धनी हैं। सतत जागरूकता, निर्मलता,पवित्रता एंव विनम्रता आपके जीवन की विशेष थाती हैं। आलस्य व प्रमाद का तो दूर-दूर तक कोई वास्ता नही। या यूं कहें कि परिश्रम की तो पराकाष्ठा ही आपके जीवन का सुनहरा पृष्ठ हैं। कथनी-करनी में एक रूपता जैसे गुण तो बचपन से सहेजे हुए हैं। कोमलता तो बाल-गोपाल सी, आभामण्डल व ओरा इतना प्रभावी कि परम पूज्यवर की ये मनमोहक मुद्रा निहारते ही रहे। गुरुदेव की एक झलक पाते ही व्यक्ति निहाल सा हो जाता हैं। हजारों-लाखों श्रद्धालुओं की भांति मेरा भी यह परम् सौभाग्य रहा हैं कि गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी व आचार्य श्री महाप्रज्ञ के गौरवशाली नेतृत्व में आपके सद-सान्निध्य से अनेकों बार लाभान्वित होता रहा हूं, मालेगांव, सूरत, जसोल तथा जैन तीर्थ नाकोड़ाजी मे पूज्य प्रवर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के प्रवास के दौरान तथा आप श्री के पृथक प्रवास के दौरान विभिन्न आयोजनों में संचालकीय दायित्व निभाने का सुअवसर मुझे मिल पाया।, आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सूरत चातुर्मास के दौरान मीडिया प्रभारी के दायित्व के तहत तथा राजस्थान पत्रिका के सूरत संस्करण में सेवारत रहते हुए अनेकों बार आप श्री का सद सान्निध्य मिलता रहा। वर्ष 2003 में प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सूरत चातुर्मास में जब मैंने पूज्य प्रवर से हमारे निवास पर पगलिया कराने हेतु अर्चना की तो पूज्य प्रवर ने महती कृपा कर उस समय पूज्य युवाचार्य श्री महाश्रमण जी को हमारा घर परसने हेतु इंगित किया। हमारे भटार स्थित आर के पार्क के निवास में आप श्री का पदार्पण हुआ,आप श्री का हमारे पूरे परिवार को करीब 15 मिनिट का सद-सान्निध्य प्राप्त हुआ, सचमुच में उन अनमोल लम्हों से हम धन्य-धन्य हो गए। आपका सद सान्निध्य हमारे राजस्थान के जसोल कस्बे में स्थित निवास पर दो बार तथा हमारे पुराने आवास पर पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी व युवाचार्य महाप्रज्ञ जी के चरण कमल पड़े। इन तमाम बेशकीमती लम्हों का जब-जब स्मरण होता है, तब असीम गौरव की अनुभूति होती हैं। जसोल चातुर्मास में तो प्रसार-प्रचार का दायित्व रहते आप श्री से संवाद साधने के सुअवसर आपकी पावन सन्निधि के दौरान अनेकों बार अर्जित हुए। जब हमने हमारे GRP Media Publication group Surat द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व पर प्रकाशित पुस्तक "CM to PM" का विमोचन कराने दिल्ली पहुंचे तो उन दिनों पूज्यवर दिल्ली के समीप NCR में विराजमान थे। तो GRP मीडिया के सम्पादन मण्डल के हम तीनों G गणपत भंसाली, R राजेश माहेश्वरी व P पंकज माहेश्वरी हम गुरु सान्निध्य में पहुंचें एंव दर्शन कर पुस्तक की प्रति पूज्य प्रवर को प्रदान की। इससे पूर्व भी GRP मीडिया के द्वारा प्रकाशित अन्ना हजारे के व्यक्तित्व पर "में भी अन्ना, तूं भी अन्ना" तथा स्मित लॉफिंग क्लब द्वारा प्रकाशित एंव मेरे द्वारा संकलित एंव सम्पादित पुस्तक "हास्यम" की प्रति आप श्री को भेंट करने का सुअवसर हमें मिल पाया। आज जन्मोत्सव के पावन अवसर पर पूज्य गुरुदेव के चरणों मे भाव भीनी वन्दना, एंव शत-शत नमन...
सूरत-- तेरापंथ धर्म संघ के ग्यारवें पट्टधर शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का आज 57 वां जन्म दिवस हैं। संवत २०१९ में (56 वर्ष पूर्व) आपका राजस्थान के सरदार शहर में जन्म हुआ था। पिता श्री झुमरमलजी व मातुश्री नेमादेवी दुगड़ के चिरंजीव मोहन दुगड़ ने संवत २०३१ (44 वर्ष पूर्व) में अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी की आज्ञानुसार मुनि श्री सुमेरमलजी स्वामी "लाडनू" के कर-कमलों से दीक्षा ग्रहण की थी। आप श्री संवत २०४६ की भाद्रवा शुक्ल ९ को "महाश्रमण" के रूप में लाडनू में तथा संवत २०५४ को भाद्रवा शुक्ल १२ के दिन युवाचार्य के रूप में गंगाशहर में पदासीन हुए। तथा आचार्य श्री के रूप में संवत २०६७ में वैशाख शुक्ला ९ (23 मई 2010) को आप श्री का पदाभिषेक हुआ। महज 12 वर्ष की लघु आयु में दीक्षित हुए तथा मोहन से महाश्रमण व वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण जी ने हजारों -हजारों किलोमीटर की पद यात्रा कर नैतिकता, आध्यत्मिकता, शांति, सद्भावना व व्यसन मुक्ति आदि की जन-जागृति भरी अलख जगाई हैं। आप धीर -गम्भीर, शांत स्वभावी, मितभाषी व्यक्तिव के धनी हैं। सतत जागरूकता, निर्मलता,पवित्रता एंव विनम्रता आपके जीवन की विशेष थाती हैं। आलस्य व प्रमाद का तो दूर-दूर तक कोई वास्ता नही। या यूं कहें कि परिश्रम की तो पराकाष्ठा ही आपके जीवन का सुनहरा पृष्ठ हैं। कथनी-करनी में एक रूपता जैसे गुण तो बचपन से सहेजे हुए हैं। कोमलता तो बाल-गोपाल सी, आभामण्डल व ओरा इतना प्रभावी कि परम पूज्यवर की ये मनमोहक मुद्रा निहारते ही रहे। गुरुदेव की एक झलक पाते ही व्यक्ति निहाल सा हो जाता हैं। हजारों-लाखों श्रद्धालुओं की भांति मेरा भी यह परम् सौभाग्य रहा हैं कि गणाधिपति गुरुदेव श्री तुलसी व आचार्य श्री महाप्रज्ञ के गौरवशाली नेतृत्व में आपके सद-सान्निध्य से अनेकों बार लाभान्वित होता रहा हूं, मालेगांव, सूरत, जसोल तथा जैन तीर्थ नाकोड़ाजी मे पूज्य प्रवर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के प्रवास के दौरान तथा आप श्री के पृथक प्रवास के दौरान विभिन्न आयोजनों में संचालकीय दायित्व निभाने का सुअवसर मुझे मिल पाया।, आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सूरत चातुर्मास के दौरान मीडिया प्रभारी के दायित्व के तहत तथा राजस्थान पत्रिका के सूरत संस्करण में सेवारत रहते हुए अनेकों बार आप श्री का सद सान्निध्य मिलता रहा। वर्ष 2003 में प्रेक्षा प्रणेता आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सूरत चातुर्मास में जब मैंने पूज्य प्रवर से हमारे निवास पर पगलिया कराने हेतु अर्चना की तो पूज्य प्रवर ने महती कृपा कर उस समय पूज्य युवाचार्य श्री महाश्रमण जी को हमारा घर परसने हेतु इंगित किया। हमारे भटार स्थित आर के पार्क के निवास में आप श्री का पदार्पण हुआ,आप श्री का हमारे पूरे परिवार को करीब 15 मिनिट का सद-सान्निध्य प्राप्त हुआ, सचमुच में उन अनमोल लम्हों से हम धन्य-धन्य हो गए। आपका सद सान्निध्य हमारे राजस्थान के जसोल कस्बे में स्थित निवास पर दो बार तथा हमारे पुराने आवास पर पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी व युवाचार्य महाप्रज्ञ जी के चरण कमल पड़े। इन तमाम बेशकीमती लम्हों का जब-जब स्मरण होता है, तब असीम गौरव की अनुभूति होती हैं। जसोल चातुर्मास में तो प्रसार-प्रचार का दायित्व रहते आप श्री से संवाद साधने के सुअवसर आपकी पावन सन्निधि के दौरान अनेकों बार अर्जित हुए। जब हमने हमारे GRP Media Publication group Surat द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व पर प्रकाशित पुस्तक "CM to PM" का विमोचन कराने दिल्ली पहुंचे तो उन दिनों पूज्यवर दिल्ली के समीप NCR में विराजमान थे। तो GRP मीडिया के सम्पादन मण्डल के हम तीनों G गणपत भंसाली, R राजेश माहेश्वरी व P पंकज माहेश्वरी हम गुरु सान्निध्य में पहुंचें एंव दर्शन कर पुस्तक की प्रति पूज्य प्रवर को प्रदान की। इससे पूर्व भी GRP मीडिया के द्वारा प्रकाशित अन्ना हजारे के व्यक्तित्व पर "में भी अन्ना, तूं भी अन्ना" तथा स्मित लॉफिंग क्लब द्वारा प्रकाशित एंव मेरे द्वारा संकलित एंव सम्पादित पुस्तक "हास्यम" की प्रति आप श्री को भेंट करने का सुअवसर हमें मिल पाया। आज जन्मोत्सव के पावन अवसर पर पूज्य गुरुदेव के चरणों मे भाव भीनी वन्दना, एंव शत-शत नमन...

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