उत्कंठित उत्केला में महातपस्वी का मंगल पदार्पण- लगभग ग्यारह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री केसिंगा से पहुंचे उत्केलाउत्केला 18 मार्च- कालाहांडी (ओड़िशा)ः केसिंगावासियों को अपने त्रिदिवसीय प्रवास से निहाल कर अहिंसा यात्रा के प्रणेता, अखंड परिव्राजक, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग पुनः प्रवर्धमान हुए और लगभग ग्यारह किलोमीटर का विहार कर उत्केला की धरती पर पधारे तो मानों उत्कंठित उत्केला को अपनी उत्कंठा का समाधान मिल गया। अपने आराध्य का भव्य स्वागत जुलूस के साथ अभिवादन करते हुए उत्केलावासी अपने आराध्य के साथ तेरापंथ भवन पहुंचे। इस दौरान उपस्थित सैंकड़ों श्रद्धालुओं पर अपने दोनों कर कमलों से आशीषवृष्टि करते हुए आचार्यश्री ऐसे गतिमान थे मानों स्वयं गंगा प्यासों को तृप्ति प्रदान करते हुए प्रवाहित हो रही हो।
केसिंगा में त्रिदिवसीय प्रवास सुसम्पन्न कर महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी रविवार को अपनी धवल सेना के साथ मंगल प्रस्थान किया तो केसिंगावासी अपने आराध्य के श्रीचरणों में बिछ गए। सभी को आशीर्वाद प्रदान करते हुए आचार्यश्री अगले गंतव्य की ओर बढ़ चले। श्रद्धालु जयघोष करते साथ चल पड़े। आचार्यश्री एक श्रद्धा के क्षेत्र से दूसरे श्रद्धा के क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। लगभग ग्यारह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री उत्केला की सीमा में पहुंचे तो श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य का भावभीना अभिनन्दन किया।
सर्वप्रथम आचार्यश्री उत्केला के तेरापंथ भवन में पधारे। उसके कुछ समय पश्चात् ही आचार्यश्री तेरापंथ भवन से कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित चाचा नेहरू विद्या मंदिर के प्रांगण में बने प्रवचन पंडाल में पधारे तो उपस्थित श्रद्धालुओं ने बुलंद जयघोष से अपने आराध्य का अभिवादन किया।
आचार्यश्री ने अपनी अमृतवाणी से उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि दुनिया में हिंसा का अंधकार है तो अहिंसा का प्रकाश भी है। दुनिया में हिंसा और अहिंसा दोनों विद्यमान है। इसमें अहिंसा का मार्ग एक ऐसा मार्ग है, जिसकी मंजिल मोक्ष है। अहिंसा के पथ पर चलने वाले पथिक को सुख-शांति की प्राप्ति हो सकती है। अहिंसा सबको सुख देने वाली होती है। अहिंसा प्राणियों जीवन को सुरक्षा प्रदान करने वाली तो हिंसा प्राणियों का जीवन समाप्त करने वाली होती है। अहिंसा सबको जीवन प्रदान करने वाली होती है। अहिंसा व्रत का पालन करने वालों के सारे पाप स्वतः नष्ट होते चले जाते हैं।
हिंसा का मार्ग अशांति, दुख प्रदान करने वाला होता है तो अहिंसा का मार्ग शांति और परमसुख को प्रदान करने वाला हेाता हे। राग-द्वेष, लोभ से मुक्त होकर आदमी अहिंसा के सत्पथ पर चलने का प्रयास करे तो मानव जीवन सार्थक हो सकता है और कभी मोक्ष की प्राप्ति भी संभव हो सकती है।
आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन से पूर्व निर्धारित समय पर उत्केलावासियों को सम्यक्त्व दीक्षा (गुरुधारणा) प्रदान की तथा श्रद्धालुओं को देव, गुरु और धर्म के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा को समर्पित करने की पावन प्रेरणा प्रदान की। मंगल प्रवचन के पश्चात् आचार्यश्री ने सभी को अहिंसा यात्रा की संकल्पत्रयी भी स्वीकार कराई।
अपने धरती पर अपने आराध्य के अभिनन्दन का सुअवसर पाकर उत्केलावासी अतिउत्साहित थे। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा उत्केला के अध्यक्ष श्री विमल जैन, पूर्व अध्यक्ष श्री रूपचंद जैन ने अपनी हर्षित भावाभिव्यक्ति श्रीचरणों में अर्पित कर पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। उत्केला तेरापंथ युवक परिषद व महिला मंडल की सदस्यायों ने स्वागत गीत का संगान कर अपने आराध्य का अभिवादन किया। तेरापंथी समाज उत्केला की ओर से संकल्पों का उपहार भेंट किया गया। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से आचार्यश्री को प्रणति अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा

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