Sunday, 1 October 2017

भारतीय परंपरा मे श्री राम आदर्श पुरुष थे – मुनि चेतन्य कुमार (अमन )

मंडिया- भारतीय परंपरा मे श्री राम आदर्श पुरुष मे माना गया है ! मर्यादा पुरुषोतम राम को सभी धर्म परंपरा मे मान्य पुरुष के रूप मे सन्मान दिया गया है ! श्री राम को राज्याभिषेक के लिए आहूत किया गया अथवा वनवास के लिए कहा गया वे दोनों स्थितियो मे संतुलित थे ! उन्होने कभी प्रसनता अथवा विवाद का जीवन नही जीया ! सम अथवा विषम स्थितियो मे संतुलन की शिक्षा भगवान राम के जीवन से सीखी जा सकती है ! उनके जीवन मे पितृ भक्ति , मातृत्व वचन की प्रतिबद्धता मर्यादा आदि अनेक सदगुणो की प्रेरणा ली जा सकती है ! आज के युग मे राम का नाम जपने वाले बहुत मिलते है ! किन्तु राम गुणो को जीवन मे अपनाने वाले कम मिलते है ! यह विचार टेरपंथ भवन मड्या मे विजयादशमी पर्व के अंतर्गत मुनि श्री चेतन्य कुमार अमन ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा मुनि श्री अमन ने कहा विजय दशमी का पर्व असत्य पर सत्य की , अनीति पर नीति की अधर्म पर धर्म की दुर्गुणों पर सदगुणो की विजय का पर्व है ! आज अपेक्षा है रावण के पुतले का दहन नही अपितु स्वयम के भीतर रहे हुए क्रोध मान माया ओर लोभ का दहन हो ! 
केवल पर्व के डीनो मे रावण के पुतले का दहन करने से रस्म अदायगी हो जाएगी किन्तु आदर्शो का आत्मसात नही होगा ! तो कल्याण भी असंभव है ! मुनिवर ने बताया की आदमी पाप छोड़ना नही ओर धर्म का फल पाना चाहता है ! अच्छे काम करता नही केवल ओर केवल राम पाना चाहता है जो की नितांत असंभव है ! अतीतकाल मे रामकथा के प्रति आकर्षण था तो वर्तमान मे भी है आज अपेक्षा है केवल श्री राम के चित्र से नही चरित्र से लेकर जीवन को वेसा बनाए ! इस अवसर पर चंदनमल बोहरा ने मंगलगीत का संगान किया ! कार्यक्रम मे पारसमल गुंदेचा 
, किशनलाल आच्छा , अर्जुन खिंवेसरा , गोतम भंसाली आदि अनेक लोग विशेष रूप से उपस्थित थे !

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