Tuesday, 26 September 2017

नैतिकता एवं अनुशासन है जीवन विकास की बुनियाद — साध्वी श्री सोमलताजी

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का प्रथम दिवस “अनुशासन दिवस” के रुप में मनाया गया
उधना - अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा उद्घोषित एवं अणुव्रत महासमिति द्वारा निर्देशित अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री सोमलता जी के सानिध्य में आज तेरापंथ भवन, उधना में शुभारंभ हुआ।
अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का प्रथम दिवस “अनुशासन दिवस” के रुप में मनाया गया।
इस अवसर पर साध्वी श्री सोमलता जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा– आचार्य श्री तुलसी दूरदर्शी आचार्य थे।उन्होंने देश की जनता के चारित्रिक उत्थान के लिए अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया।जाति-पांति, संप्रदाय और ऊंच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर समूची मानव जाति के कल्याण के लिए उन्होंने चिंतन किया। व्यक्ति सुधार के द्वारा समाज सुधार एवं समाज सुधार के द्वारा राष्ट्र सुधार का उन्होंने जो स्वप्न देखा, उसी का मूर्त रूप है अणुव्रत आंदोलन।
साध्वी श्री ने आगे कहा- भारत देश स्वतंत्र तो हुआ लेकिन लोग स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छन्दता करने लगे। स्वच्छन्दता पतन का मार्ग है। देश को विकास के मार्ग पर ले जाना है तो सर्वप्रथम आवश्यकता है अनुशासन की। अनुशासन का अर्थ है-विवेक। आहार में विवेक, वाणी में विवेक, चलने में विवेक, व्यवहार एवं वर्तन में विवेक। विवेक का पर्यायवाची नाम ही है अनुशासन। अणुव्रत नैतिक मूल्यों के आचरण की एवं संवर्धन की कला सिखाता है। वास्तव में नैतिकता एवं अनुशासन ही जीवन विकास के बुनियादी तत्व हैँ।
साध्वी श्री शकुंतला कुमारीजी, संचितयशा जी, जागृतप्रभाजी एवं रक्षितयशा जी ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अवसर पर मंगल भावना प्रदर्शित की ।अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री कांतिलाल जी सिसोदिया ने अणुव्रत को वैश्विक समस्याओं के समाधान में उपयोगी बताया। उपाध्यक्ष श्री नेमीचंदजी कावडिया ने अणुव्रत की परिभाषा एवं प्रासंगिकता का प्रतिपादन किया। तेरापंथी सभा, उधना के अध्यक्ष श्री बसंतीलाल जी नाहर ने स्वागत वक्तव्य दिया।अणुव्रत समिति के पूर्व अध्यक्ष श्री जयंती भाई कोठारी ने आभार ज्ञापन किया। अणुव्रत समिति के परामर्शक श्री बालचंदजी बेताला, “अणुव्रत सेवी” अर्जुन जी मेड़तवाल, लक्ष्मी लालजी बाफणा, मोहनजी पोरवाड़, लादुलालजी नंगावत, अशोकजी दुग्गड़, राकेशजी चोरडिया आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अणुव्रत समिति के मंत्री श्री विजयजी पालगोता ने किया। तेरापंथ महिला मंडल ने अणुव्रत गीत का संगान किया

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